डॉ० कुँअर बेचैन जी का साहित्य
डॉ० कुँअर बेचैन ऑफीशियल वेबसाईट
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दुनिया ने मुझ पे फेंके थे पत्थर जो बेहिसाब, मैंने उन्हीं को जोड़ के कुछ घर बना लिए
कोई नहीं है देखने वाला तो क्या हुआतेरी तरफ़ नहीं है उजाला तो क्या हुआ चारों तरफ़ हवाओं में उस की महक तो हैमुरझा रही है साँस की माला तो क्या हुआ बदले में तुझको दे तो गए भूक और प्यासमुँह से जो तेरे छीना […]
ग़ज़ल